मनोबल ही जीवन शक्ति है (कुछ सच्ची कहानियां)


वह झटके के साथ नीचे गिरा और ऐंठ गया। फिर भी आर्श्चय था कि उसमें जान बाकी थी। उसे कारखाने से करीब एक मील दूर स्थित अस्पताल में पहुँचाया गया। अस्पताल के प्रमुख चिकित्सकों ने उसका परीक्षण किया आर मुख्य चिकित्साधिकारी इस निर्ष्कष पर पहुँचे कि घायल के साथ कितना ही परिश्रम क्यों न किया जाये असे बचाया नहीं जा सकता। फिर भी चिकित्सकों ने अपना कर्त्तव्य निभाया और साधारण मरहम पट्टी कर दी। आर्श्चय तो उस समय हुआ जब उसी दिन वेग की बेहोशी टूटी। डाँक्टर बेहोशी टूटने की आशा करना तो अलग रहा, इस बात की प्रतीक्षा कर रहे थे कि वेग की साँसें कितनी देर तक साथ देती हैं ?

उसका खून बहना बन्द नहीं हुआ था, फिर भी दर्द को सहा और रात दस बजे वहाँ उपस्थित लोगों से बातें करने लगा। इसके बाद तो डाँक्टरों में भी वेग के जीवित बच जाने की आशा जगी। वह तेजी से अच्छा होने लगा और तीन माह तक अस्पताल में रहने के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर आ गया। अस्पताल के अधिकारियों ने जो अन्तिम रिपोर्ट तैयार की, वह विश्व के मूर्धन्य चिकित्सकों के लिए आज भी अध्ययन और आर्श्चय की वस्तु बनी हुई है। वेग की नेत्र ज्योति तो चली गई थी, पर उसका बाकी मस्तिष्क पूरी तरह ठीक हो गया और वह अपना सामान्य जीवन क्रम ठीक तरह से चलाने लगा। इतने भयानक मस्तिष्कीय आघात के बाद भी कोई व्यक्ति जीवित बच सकता है, वरन् स्वस्थ सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है, इस पर शरीर विज्ञानियों को सहसा विश्वास नहीं हो सकता। परन्तु वेग की टूटी हुई खोपडी के अस्थि खण्ड तथा उससे सम्बन्धित पदार्थ व कागजात हार्वर्ड मेडिकल कालेज बुकलिन के संग्रहालय में सुरक्षित रखे हैं, साथ ही वह बरमा भी रखा हुआ है जो वेग की खोपड़ी को चीरता हुआ बाहर निकला था।

यह घटना इस बात की साक्षी है कि जीवन मृत्यु से अधिक बलवान है। यहाँ जीवन का अर्थ जन्म और मृत्यु के बीच की अवधि नहीं है, अपितु उस जीवटता से है जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी मनुष्य को सक्षम बनाये रखती है। शरीर वैसे हाड़-माँस से बना दिखाई देता है। इसे मिट्टी का पुतला और क्षणभंगुर कहा जाता है, परन्तु इसके भीतर विद्यमान जीवटता को देखते हैं तो कहना पडेगा कि उसकी संरचना अष्ट धातुओं से भी मजबूत तत्वों द्वारा मिलकर बनी हुई है। छोटी-मोटी, टूट-फूट, हारी-बीमारी तो रक्त के श्वेतकण तथा दूसरे संरक्षणकर्ता, शामक तत्व अनायास ही दूर करते रहते हैं, परन्तु भारी संकट आ उपस्थित होने पर भी यदि साहस न खोया जाय तो उत्कट इच्छा शक्ति के सहारे उनका सामना सफलतापूर्वक किया जा सकता है।

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